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उत्तराखण्ड की रेल परियोजनाओं की समीक्षा, कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मिली गति

By RAJAT AIKANT SHARMA SHARMA • 2026-06-20 12:37 • 3 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
उत्तराखण्ड की रेल परियोजनाओं की समीक्षा, कई महत्वपूर्ण योजनाओं को मिली गति

देहरादून, 20 जून 2026। मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन और रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष के बीच हुई बैठक में उत्तराखण्ड की विभिन्न रेल परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि ऋषिकेश–कर्णप्रयाग रेल लाइन परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

बैठक के दौरान राज्य सरकार ने ऋषिकेश–उत्तरकाशी रेल लाइन परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) को शीघ्र स्वीकृति देने तथा इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित कर 100 प्रतिशत केंद्रीय वित्तपोषण उपलब्ध कराने का अनुरोध किया।

हरिद्वार–मोतीचूर–रायवाला रेल लाइन दोहरीकरण परियोजना की समीक्षा के दौरान रेलवे बोर्ड ने बताया कि परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और इसे दो चरणों में पूरा किया जाएगा। हरिद्वार–मोतीचूर खंड में अतिक्रमण को प्रमुख चुनौती बताया गया, जिस पर राज्य सरकार ने आवश्यक सहयोग का आश्वासन दिया।

बैठक में रायवाला से देहरादून तक रेल लाइन दोहरीकरण के लिए सर्वेक्षण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। राज्य सरकार ने कुम्भ 2033 को ध्यान में रखते हुए सर्वेक्षण कार्य समयबद्ध रूप से पूरा करने का आग्रह किया। रायवाला क्षेत्र में भविष्य की यातायात आवश्यकताओं को देखते हुए वायाडक्ट (ऊंचे रेल पुल) निर्माण का सुझाव भी रखा गया।

मुख्य सचिव ने निर्माणाधीन रेल परियोजनाओं में प्रस्तावित एस्केप टनलों को मोटरेबल बनाने का सुझाव दिया, ताकि आपदा या आपातकालीन परिस्थितियों में उनका उपयोग वाहनों की आवाजाही के लिए भी किया जा सके।

बैठक में टनकपुर–बागेश्वर रेल लाइन परियोजना की डीपीआर को शीघ्र स्वीकृति देने की मांग भी दोहराई गई।

मेरठ–हरिद्वार–ऋषिकेश आरआरटीएस (रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम) कॉरिडोर के संबंध में लगभग 78 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित संरेखण को सैद्धांतिक सहमति मिलने की जानकारी दी गई। परियोजना की डीपीआर तैयार की जानी है तथा इसके लिए राज्य सरकार ने अपर सचिव रीना जोशी को नोडल अधिकारी नामित किया है।

रेलवे बोर्ड के अनुसार, देहरादून रेलवे स्टेशन को आधुनिक सुविधाओं से युक्त स्टेशन के रूप में विकसित किया जा रहा है, जबकि हर्रावाला रेलवे स्टेशन के लिए भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए विकास योजना तैयार की जा रही है।

बैठक में आगामी कुम्भ 2033 के मद्देनजर रेलवे अवसंरचना के लिए दीर्घकालिक, मध्यम अवधि और अल्पकालिक योजनाएं तैयार करने पर भी जोर दिया गया।