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सुभाष नगर में नन्हे हाथों ने संवारा पर्यावरण: स्वामी विवेकानंद वेलफेयर आरडब्ल्यूए द्वारा सफाई और वृक्षारोपण अभियान का आयोजन

By ARUN MAHAJAN • 2026-04-13 14:36 • 3 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
सुभाष नगर में नन्हे हाथों ने संवारा पर्यावरण: स्वामी विवेकानंद वेलफेयर आरडब्ल्यूए द्वारा सफाई और वृक्षारोपण अभियान का आयोजन
नई दिल्ली, सुभाष नगर: राजधानी के सुभाष नगर स्थित स्वामी विवेकानंद वेलफेयर रेजिडेंस आरडब्ल्यूए (RWA) द्वारा रविवार को एक विशेष 'सफाई अभियान' और 'वृक्षारोपण कार्यक्रम' का सफल आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि समाज को स्वच्छ और हरा-भरा बनाने की कमान इस बार सोसायटी के नन्हे बच्चों ने संभाली। नन्हे पर्यावरण योद्धाओं का उत्साह: सुबह से ही सोसायटी के पार्कों और गलियों में बच्चों की टोली हाथों में झाड़ू, दस्ताने और नन्हे पौधों के साथ नजर आई। "स्वच्छ भारत, स्वस्थ भारत" और "पेड़ लगाओ, जीवन बचाओ" के नारों के साथ बच्चों ने पूरे जोश के साथ सफाई अभियान में भाग लिया। बच्चों ने न केवल कचरा इकट्ठा किया, बल्कि सोसायटी के सदस्यों को कूड़े के सही निस्तारण के बारे में भी जागरूक किया। वृक्षारोपण से दी हरियाली की सौगात: सफाई के बाद, आरडब्ल्यूए के सदस्यों के मार्गदर्शन में बच्चों ने सोसायटी परिसर में विभिन्न छायादार और फलदार पौधे लगाए। बच्चों ने बड़े उत्साह से मिट्टी खोदी और पौधों को पानी दिया। आरडब्ल्यूए के पदाधिकारियों ने बच्चों को यह संकल्प भी दिलाया कि वे इन पौधों की देखभाल अपने छोटे भाई-बहनों की तरह आरडब्ल्यूए का संदेश: स्वामी विवेकानंद वेलफेयर आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष ने कार्यक्रम के दौरान कहा: "हमारा उद्देश्य केवल सफाई करना नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी के मन में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी का भाव जगाना है। जब बच्चे खुद अपने हाथों से पेड़ लगाते हैं, तो वे प्रकृति के करीब आते हैं।" प्रमुख विशेषताएं: सामुदायिक सहभागिता: बच्चों के साथ-साथ उनके अभिभावकों और बुजुर्गों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। खेल-खेल में सीख: बच्चों के लिए इस अभियान को एक उत्सव जैसा बनाया गया, ताकि वे आनंद लेते हुए सामाजिक कार्य सीख सकें। पुरस्कार वितरण: अंत में, सफाई और पौधारोपण में सक्रिय भूमिका निभाने वाले बच्चों को छोटे उपहार देकर प्रोत्साहित किया गया। इस पहल की पूरी सुभाष नगर क्षेत्र में सराहना की जा रही है। सोसायटी के सदस्यों का मानना है कि ऐसे आयोजनों से न केवल पर्यावरण सुरक्षित रहता है, बल्कि समुदाय में आपसी प्रेम और एकता भी बढ़ती है।