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खनन के गढ़ सोनभद्र मे संबंधित पढ़ाई का नही इंतजामः सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में माइनिंग डिप्लोमा शुरू करने की मांग

By ARUN KUMAR SINGH KUMAR SINGH • 2026-03-17 11:38 • 3 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
खनन के गढ़ सोनभद्र मे संबंधित पढ़ाई का नही इंतजामः सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज में माइनिंग डिप्लोमा शुरू करने की मांग
खनिज संपदा से समृद सोनभद्र में सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजो मे माइनिंग डिप्लोमा कोर्स संचालित नही होने से स्थानीय युवाओं को खनन क्षेत्र में तकनीकी शिक्षा प्राप्त करने में कठिनाइयो का सामना करना पड़ रहा है। अब जिले मे इस कोर्स को शुरू करने की मांग तेज होने लगी है। जिले मे खनन की व्यापक संभावनाओं के बावजूद विद्यार्थियों को माइनिंग डिप्लोमा की पढ़ाई के लिए प्रदेश के अन्य जिलों या दूसरे राज्यों का रुख करना पड़ता है। आर्थिक रूप से कमजोर और आदिवासी बहुल क्षेत्र होने के कारण अधिकांश युवा इतनी दूर जाकर पढ़ाई करने में असमर्थ रहते हैं, वे इस तकनीकी शिक्षा से वंचित रह जाते हैं। सोनभद्र में कई सरकारी और निजी औद्योगिक प्रतिष्ठान संचालित हैं, जहा पर खनन गतिविधियां होती हैं। इनमें कोल इंडिया की अनुषंगी कंपनी नॉर्दर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एनसीएल) के साथ ओबरा और डाला क्षेत्र की पत्थर खदान प्रमुख हैं। इन क्षेत्रों में प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियो की लगातार जरूरत बनी रहती है। डिप्लोमा के पूर्व छात्र और सामाजिक कार्यकर्ता (बाबा) ने बताया कि वर्तमान में उत्तर प्रदेश में केवल ललितपुर जिले के तालबेहट स्थित सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेज मे ही तीन वर्षीय माइनिंग डिप्लोमा पाठ्यक्रम संचालित है। सोनभद्र के विद्यार्थियों को इस कोर्स की पढ़ाई के लिए लगभग 700 किलोमीटर दूर जाना पड़ता है, जो विशेषकर ठंड और प्रतिकूल मौसम में काफी कठिन होता है। मांग की है कि सोनभद्र जिले के सरकारी पॉलिटेक्निक कॉलेजो मे भी तीन वर्षीय माइनिंग डिप्लोमा कोर्स शुरू किया जाए। स्थानीय आदिवासी और अन्य वर्गों के युवाओं को कम खर्च में तकनीकी शिक्षा मिल सकेगी। इस कोर्स के माध्यम से छात्रों को खदानो मे पाई जान े वाली गैसों, ब्लास्टिंग तकनीक, खनन सुरक्षा नियमो और हैवी अर्थ मूविंग मशीनरी (एचईएमएम) के संचालन की जानकारी मिलती है।स्थानीय स्तर पर यह कोर्स शुरू होने से युवाओं के लिए खनन क्षेत्र में सरकारी और निजी कंपनियो ं में रोजगार के नए अवसर खुलेंगे। साथ ही क्षेत्र के औद्योगिक विकास को भी गति मिलेगी और प्रशिक्षित तकनीकी कार्यबल की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।