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नए घर, पुरानी चिंताएँ: बिरसानगर, बारीडीह, कासीदीह और मिरुडीह-गम्हरिया में प्रधानमंत्री आवास योजना पर सवाल

By SHIV KUMAR KUMAR • 2026-04-28 18:21 • 3 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
नए घर, पुरानी चिंताएँ: बिरसानगर, बारीडीह, कासीदीह और मिरुडीह-गम्हरिया में प्रधानमंत्री आवास योजना पर सवाल
शहर के बिरसानगर, बारीडीह, कासीदीह और मिरुडीह-गम्हरिया इलाकों में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) के तहत बनाए गए नए घर एक ओर जहाँ गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बने हैं, वहीं दूसरी ओर इन घरों से जुड़ी कई समस्याएँ भी सामने आ रही हैं। ज़मीनी हकीकत यह दिखाती है कि “सबके लिए घर” का सपना अभी अधूरा नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को पक्का और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना है। सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत जमशेदपुर के इन क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मकानों का निर्माण किया गया है। कई परिवारों को नए घर मिले भी हैं, लेकिन लाभार्थियों और स्थानीय लोगों का कहना है कि योजना के क्रियान्वयन में कई खामियाँ हैं। आवंटन प्रक्रिया पर उठे सवाल बिरसानगर और कासीडीह मिरुडीह में कई लोगों ने आरोप लगाया है कि पात्र होने के बावजूद उन्हें आवास का लाभ नहीं मिला। वहीं कुछ ऐसे मामलों की भी चर्चा है जहाँ अपात्र व्यक्तियों को घर आवंटित कर दिए गए। बिरसानगर मैं कुछ मकान बनकर तैयार हैं, लेकिन इन्हीं समस्या के कारण अभी तक उनका आवंटन नहीं हुआ है, जिससे वे खाली पड़े हैं। बुनियादी सुविधाओं की कमी बिरसानगर बारीडीह और मिरुडीह-गम्हरिया क्षेत्रों में रहने वाले लोगों का कहना है कि नए घरों में शिफ्ट होने के बाद भी उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई जगहों पर पानी की नियमित सप्लाई नहीं है, सड़कों की हालत खराब है और नाली व्यवस्था अधूरी है। बिजली कनेक्शन भी कई घरों में अभी तक पूरी तरह से चालू नहीं हो पाए हैं। निर्माण गुणवत्ता पर सवाल कुछ लाभार्थियों ने निर्माण की गुणवत्ता को लेकर भी चिंता जताई है। उनके अनुसार, कई घरों में दीवारों में दरारें आ गई हैं और बारिश के समय रास्ते पे पानी का भरा होने की समस्या होती है। इससे लोगों में असंतोष बढ़ रहा है और योजना की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ रहा है। सामाजिक और आर्थिक असर विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ घर उपलब्ध कराना ही पर्याप्त नहीं है। कई परिवारों को नए स्थानों पर बसाया गया है, जहाँ उनके रोजगार के अवसर सीमित हैं। इससे उनके जीवनयापन पर असर पड़ रहा है। साथ ही, पुराने सामाजिक नेटवर्क से दूर होने के कारण भी उन्हें कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन की प्रतिक्रिया स्थानीय प्रशासन का कहना है कि इन समस्याओं को गंभीरता से लिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, आवंटन प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। साथ ही, निर्माण गुणवत्ता की जांच भी कराई जा रही है। निष्कर्ष प्रधानमंत्री आवास योजना ने निश्चित रूप से कई परिवारों को पक्का घर देने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन जमशेदपुर के इन इलाकों में अभी भी कई चुनौतियाँ बाकी हैं। जब तक आवंटन में पारदर्शिता, बेहतर निर्माण गुणवत्ता और पूर्ण बुनियादी सुविधाएँ सुनिश्चित नहीं की जातीं, तब तक “नए घर” वास्तव में “बेहतर जीवन” का प्रतीक नहीं बन पाएंगे।