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कौशाम्बी में प्रशासन का छोटा प्रहार ठेलों पर छापेमारी पर क्या असली कालाबाजारी के बड़े मगरमच्छ सुरक्षित है

By ANAND KUMAR DWIVEDI • 2026-03-16 23:48 • 4 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
कौशाम्बी में प्रशासन का छोटा प्रहार ठेलों पर छापेमारी पर क्या असली कालाबाजारी के बड़े मगरमच्छ सुरक्षित है
*कौशाम्बी में प्रशासन का छोटा प्रहार ठेलों पर छापेमारी पर क्या असली कालाबाजारी के बड़े मगरमच्छ सुरक्षित हैं* *नियमों की आंच में झुलसती रोजी रोटी गैस सिलेंडर जब्ती के नाम पर गरीबों के चूल्हे बुझाने की कवायद* (आनन्द कुमार द्विवेदी/ब्यूरो कौशाम्बी) कौशाम्बी के मंझनपुर और आसपास के इलाकों में घरेलू गैस सिलेंडरों के दुरुपयोग को रोकने के नाम पर प्रशासन की हालिया कार्रवाई ने एक गंभीर सामाजिक और नैतिक सवाल खड़ा कर दिया है जिला पूर्ति अधिकारी के नेतृत्व में जांच टीमों ने जसलोक फास्टफूड केजीएन रेस्टोरेंट सहित कई ढाबों और सड़क किनारे लगने वाले ठेलों पर सघन छापेमारी की इस अभियान के दौरान 7 खाली और 1 भरा हुआ सिलेंडर जब्त किया गया जिसे प्रशासन अपनी बड़ी उपलब्धि बता रहा है सरकारी फाइलों में इसे कालाबाजारी पर प्रहार दर्ज किया जा सकता है लेकिन धरातल की हकीकत कुछ और ही बयां करती है सवाल यह उठता है कि क्या रोज 400-500 रुपये की दिहाड़ी पर निर्भर रहने वाला ठेला लारी संचालक जो खुद एक अदद सिलेंडर के लिए घंटों मशक्कत और जुगाड़ करता है वह कालाबाजारी का मास्टरमाइंड हो सकता है क्या अपने परिवार का पेट पालने के लिए संघर्ष कर रहे इन छोटे कामगारों पर कार्रवाई करना ही प्रशासन की प्राथमिकता है स्थानीय जनता और प्रबुद्ध वर्ग के बीच यह चर्चा आम है कि प्रशासन का नियमों का डंडा अक्सर उन्हीं पर चलता है जिनकी पहुंच सत्ता के गलियारों तक नहीं है मंझनपुर क्षेत्र के बड़े और रसूखदार रेस्टोरेंट जहां दर्जनों घरेलू सिलेंडरों का बेखौफ इस्तेमाल होता है वहां जांच टीमें पहुंचने से क्यों कतराती हैं शादी विवाह के बड़े आयोजनों में जहां रसूखदार परिवारों के यहाँ सिलेंडरों की कतारें लगी होती हैं क्या वहां कभी किसी अधिकारी ने सिलेंडर की गिनती करने की जहमत उठाई असली कालाबाजारी तो उन गैस एजेंसियों और चलते पुर्जे लोगों के गठजोड़ से होती है जो पर्दे के पीछे बैठकर सप्लाई चेन को प्रभावित करते हैं उन पर शिकंजा कसने के बजाय गरीब के चूल्हे को निशाना बनाना न्यायसंगत नहीं जान पड़ता नियमों के मुताबिक व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में कमर्शियल सिलेंडर नीला सिलेंडर का उपयोग अनिवार्य है लेकिन छोटे दुकानदारों के लिए इसकी उपलब्धता और कीमत हमेशा से एक बड़ी बाधा रही है प्रशासन को चाहिए कि वह सिर्फ छापेमारी कर खानापूर्ति न करे बल्कि उस सिस्टम पर प्रहार करे जो कालाबाजारी की जड़ है गरीब का ठेला जब्त कर लेना आसान है लेकिन उस माफिया तंत्र को तोड़ना चुनौतीपूर्ण जो किल्लत पैदा कर आम जनता की जेब पर डाका डालता है अगर मंझनपुर प्रशासन वाकई गंभीर है तो उसे चुनिंदा कार्रवाई के बजाय न्यायपूर्ण कार्रवाई का उदाहरण पेश करना होगा जब कानून का हाथ सिर्फ कमजोर की गर्दन तक पहुँचता है तो वह व्यवस्था नहीं व्यवस्था की विफलता कहलाती है प्रशासन को अपनी दूरबीन का फोकस ठेलों से हटाकर उन बड़े गोदामों और रसूखदार प्रतिष्ठानों पर करना चाहिए जहाँ नियम रोज सरेआम तोड़े जाते हैं