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नाले से निकली मीथेन गैस पर जलेगा चूल्हा, बृजविहार के लोगों की अनोखी पहल, [गाज़ियाबाद]

By MUKESH AGRAWAL AGRAWAL • 2026-04-02 18:55 • 4 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
नाले से निकली मीथेन गैस पर जलेगा चूल्हा, बृजविहार के लोगों की अनोखी पहल, [गाज़ियाबाद]
गाजियाबाद के बृजविहार इलाके से सामने आई यह अभिनव पहल वाकई काबिल-ए-तारीफ है। कूड़े और नाले की गंदगी को ऊर्जा में बदलने की इस कोशिश पर आधारित लेख नीचे दिया गया है: ​गाजियाबाद: नाले की गंदगी से अब जलेगा चूल्हा! बृजविहार के लोगों ने पेश की 'कचरे से कंचन' की अनूठी मिसाल ​गाजियाबाद: अक्सर नगर निगम और प्रशासन की अनदेखी का शिकार रहने वाले नाले अब लोगों की रसोई का सहारा बनने जा रहे हैं। गाजियाबाद के बृजविहार क्षेत्र में स्थानीय निवासियों और विशेषज्ञों ने मिलकर एक ऐसा सफल प्रयोग किया है, जिसकी चर्चा पूरे प्रदेश में हो रही है। यहाँ नाले के गंदे पानी से निकलने वाली मीथेन गैस (CH_4) को इकट्ठा कर उसका उपयोग खाना पकाने के ईंधन के रूप में किया जा रहा है। ​कैसे काम करती है यह तकनीक? ​यह पूरा सिस्टम 'वेस्ट-टू-एनर्जी' (Waste-to-Energy) के सिद्धांत पर आधारित है। नाले में जमा गंदगी और सिल्ट जब सड़ती है, तो प्राकृतिक रूप से मीथेन गैस उत्पन्न होती है। ​गैस कैप्चरिंग: नाले के एक हिस्से को ढककर वहां पाइप लगाए गए हैं। ​फिल्ट्रेशन: पाइप के जरिए गैस को एक ड्रम या टैंक में स्टोर किया जाता है, जहाँ उसे फिल्टर किया जाता है। ​सप्लाई: फिल्टर होने के बाद यह गैस पाइपलाइन के जरिए सीधे चूल्हे तक पहुंचती है। ​बृजविहार की इस पहल के मुख्य लाभ ​सस्ता ईंधन: एलपीजी (LPG) की बढ़ती कीमतों के बीच यह निवासियों के लिए एक मुफ्त और टिकाऊ विकल्प साबित हो रहा है। ​प्रदूषण में कमी: नाले से निकलने वाली दुर्गंध और हानिकारक गैसों को वातावरण में घुलने से पहले ही ऊर्जा में बदल दिया जाता है। ​स्वच्छता: इस प्रोजेक्ट की वजह से नाले की नियमित सफाई और उसके रख-रखाव पर स्थानीय लोग खुद ध्यान दे रहे हैं। ​एक नजर: नाले से गैस उत्पादन की प्रक्रिया चरण विवरण स्रोत नाले की सिल्ट और कार्बनिक कचरा (Organic Waste) गैस का प्रकार बायोगैस (मुख्यतः मीथेन) उपयोग खाना पकाने और छोटे लैंप जलाने में प्रभाव कार्बन फुटप्रिंट में कमी और नाले की सफाई ​"हमने अक्सर देखा है कि नालों से गैस निकलने के कारण छोटे-मोटे विस्फोट या आग लग जाती है। हमने उसी ऊर्जा को दिशा देने की कोशिश की है। अगर इसे बड़े स्तर पर लागू किया जाए, तो स्लम बस्तियों और आसपास के इलाकों में ईंधन की समस्या खत्म हो सकती है।" — स्थानीय निवासी/स्वयंसेवक ​प्रशासन के लिए एक मॉडल ​बृजविहार के लोगों की यह आत्मनिर्भर पहल गाजियाबाद नगर निगम और अन्य शहरों के लिए एक मॉडल बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार इस तकनीक को समर्थन दे, तो नालों से पैदा होने वाली बिजली और गैस से नगर निगम की लागत को कम किया जा सकता है और स्वच्छता अभियान को नया आयाम दिया जा सकता है।