LATEST NEWS

निकाय चुनाव में मतदान केंद्र पर विवाद, राजनीतिक गलियारों में छिड़ी बहस

By GAURAV CHAUHAN • 2026-06-11 16:24 • 3 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
निकाय चुनाव में मतदान केंद्र पर विवाद, राजनीतिक गलियारों में छिड़ी बहस

देहरादून। उत्तराखंड में निकाय चुनाव के दौरान एक मतदान केंद्र पर हुई घटना ने राजनीतिक हलकों में चर्चा को जन्म दिया है। मतदान प्रक्रिया के दौरान राज्य के कैबिनेट मंत्री सुभोध उनियाल और उत्तराखंड क्रांति दल (यूकेडी) की नेता प्रमिला रावत के बीच मतदान केंद्र पर लागू नियमों को लेकर बहस होने की जानकारी सामने आई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, मतदान केंद्र पर मंत्री सुभोध उनियाल के पहुंचने के दौरान प्रमिला रावत ने चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों और मतदान केंद्रों पर लागू नियमों का हवाला देते हुए आपत्ति दर्ज कराई। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया के दौरान निर्धारित नियमों का पालन सभी जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा समान रूप से किया जाना चाहिए।

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नियमों को लेकर शुरू हुई चर्चा बाद में तीखी बहस में बदल गई। यूकेडी से जुड़े कुछ कार्यकर्ताओं ने आरोप लगाया कि इस दौरान प्रमिला रावत के साथ अनुचित व्यवहार किया गया। वहीं भाजपा समर्थकों का कहना है कि घटना को राजनीतिक रूप से प्रस्तुत किया जा रहा है और तथ्यों को लेकर अलग-अलग दावे किए जा रहे हैं।

घटना के बाद दोनों दलों के कार्यकर्ताओं के बीच इस विषय को लेकर चर्चा तेज हो गई। सोशल मीडिया पर भी मामले से जुड़े वीडियो और विभिन्न प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। विपक्षी दल इस मुद्दे को चुनावी नियमों और लोकतांत्रिक मर्यादाओं से जोड़कर देख रहे हैं, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि चुनावी माहौल में अनावश्यक विवाद खड़ा किया जा रहा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि स्थानीय चुनावों के दौरान इस प्रकार के विवाद जनता का ध्यान मूल मुद्दों से भटका सकते हैं। ऐसे समय में सभी राजनीतिक दलों और नेताओं के लिए लोकतांत्रिक मूल्यों, चुनावी नियमों और राजनीतिक शिष्टाचार का पालन महत्वपूर्ण है।

फिलहाल मामले को लेकर राजनीतिक बयानबाजी जारी है। यदि इस संबंध में कोई औपचारिक शिकायत दर्ज की जाती है, तो निर्वाचन अधिकारियों और प्रशासन द्वारा तथ्यों की जांच के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।

नोट: घटना से संबंधित विभिन्न दावे संबंधित पक्षों द्वारा किए गए हैं। इन दावों की स्वतंत्र अथवा आधिकारिक पुष्टि होना शेष है।