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भारत का स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र ₹1.2 लाख करोड़ के पार (FY25)

By ABHISHEK UPADHYAYA • 2026-04-11 10:18 • 3 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
भारत का स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र ₹1.2 लाख करोड़ के पार (FY25)
भारत का स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र ₹1.2 लाख करोड़ के पार (FY25) Press Information Bureau (PIB) द्वारा 26 मार्च 2026 को जारी प्रेस रिलीज़ के अनुसार, भारत का स्वास्थ्य बीमा क्षेत्र एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर पार कर चुका है। वित्त वर्ष 2024–25 में स्वास्थ्य बीमा प्रीमियम संग्रह ₹1.2 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। यह उपलब्धि इस बात का संकेत है कि स्वास्थ्य बीमा अब देश में एक आवश्यक वित्तीय सुरक्षा साधन के रूप में स्थापित हो चुका है। उद्योग के अनुमानों के अनुसार, स्वास्थ्य बीमा अब नॉन-लाइफ इंश्योरेंस सेक्टर में लगभग 40–42 प्रतिशत का योगदान देता है, जिससे यह सबसे बड़ा सेगमेंट बन गया है। बढ़ती जागरूकता, चिकित्सा महंगाई और जोखिम के प्रति संवेदनशीलता इस वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। वित्त वर्ष 2024–25 के दौरान इस क्षेत्र की वृद्धि दर संतुलित रही है। कोविड काल के दौरान स्वास्थ्य बीमा की मांग में असाधारण उछाल आया था, जिससे इस क्षेत्र का आधार काफी ऊंचा हो गया। ऐसे में वर्तमान वृद्धि को गिरावट के रूप में नहीं, बल्कि स्थिर और टिकाऊ विकास के रूप में देखा जा रहा है। बढ़ता बाजार आकार और निरंतर बनी मांग इस ग्रोथ को लंबे समय तक बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। इस वर्ष बीमा कंपनियों ने 3.26 करोड़ से अधिक क्लेम सेटल किए, जिनकी कुल राशि ₹94,247 करोड़ रही। लगभग 87.5 प्रतिशत का क्लेम रेश्यो यह दर्शाता है कि स्वास्थ्य बीमा अब वास्तविक जरूरतों को पूरा करने में सक्रिय भूमिका निभा रहा है। इस अवधि में GST संरचना में बदलाव भी एक महत्वपूर्ण कारक रहा। 22 सितंबर 2025 से व्यक्तिगत स्वास्थ्य बीमा पॉलिसियों पर GST को 18 प्रतिशत से घटाकर शून्य कर दिया गया, जिससे ग्राहकों को सीधा लाभ मिला और बीमा अधिक सुलभ हुआ। हालांकि, Input Tax Credit (ITC) के अभाव के कारण कंपनियों को कुछ लागत समायोजन करना पड़ता है, जिससे वास्तविक लाभ सीमित रह सकता है। बढ़ते क्लेम और शिकायतों के बीच Insurance Regulatory and Development Authority of India ने “1–3 नियम” लागू किया है, जिसके तहत अस्पताल में भर्ती के लिए एक घंटे और डिस्चार्ज के लिए तीन घंटे के भीतर अनुमोदन सुनिश्चित किया गया है। यह कदम ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण है। कुल मिलाकर, ₹1.2 लाख करोड़ का यह आंकड़ा दर्शाता है कि स्वास्थ्य बीमा अब विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता बन चुका है, और आने वाले वर्षों में इसकी भूमिका और मजबूत होने की संभावना है।