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भारत में “Advocates Protection Act” : आवश्यकता, वर्तमान स्थिति और आगे की राह

By ANSHUMAN DUBEY DUBEY • 2026-05-07 14:45 • 3 views   Share WhatsApp Share Facebook Share X
भारत में “Advocates Protection Act” : आवश्यकता, वर्तमान स्थिति और आगे की राह

भारत जैसे लोकतांत्रिक देश में न्यायपालिका की मजबूती केवल न्यायाधीशों तक सीमित नहीं है, बल्कि अधिवक्ताओं की भूमिका भी इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। अधिवक्ता न्यायिक प्रक्रिया का अभिन्न हिस्सा होते हैं, जो न्यायालय के समक्ष तथ्यों और कानूनी पक्षों को प्रस्तुत करते हैं। ऐसे में अधिवक्ताओं की सुरक्षा का विषय समय-समय पर चर्चा का केंद्र बनता रहा है।

पिछले कुछ वर्षों में देश के विभिन्न हिस्सों से अधिवक्ताओं के साथ हिंसा, धमकी और उत्पीड़न की घटनाएँ सामने आई हैं। अधिवक्ता संगठनों का कहना है कि ऐसी घटनाएँ न्यायिक कार्यप्रणाली को प्रभावित कर सकती हैं और अधिवक्ताओं के कार्य वातावरण पर असर डालती हैं।

वर्तमान में अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए कोई अलग केंद्रीय कानून लागू नहीं है। हालांकि भारतीय दंड संहिता और अन्य सामान्य कानून सभी नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं। इसके बावजूद विभिन्न बार एसोसिएशन और बार काउंसिल ऑफ इंडिया लंबे समय से “Advocates Protection Act” की मांग करते रहे हैं।

इस प्रस्तावित कानून के समर्थन में यह तर्क दिया जाता है कि अधिवक्ताओं को पेशेगत कार्य के दौरान विशेष सुरक्षा, त्वरित जांच और न्यायिक प्रक्रिया में हस्तक्षेप रोकने जैसे प्रावधान मिलने चाहिए। कुछ राज्यों में इस दिशा में पहल भी की गई है तथा अधिवक्ता सुरक्षा से जुड़े विधेयकों पर चर्चा हुई है।

वहीं, कुछ विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि किसी एक पेशे के लिए अलग कानून बनाते समय संतुलन बनाए रखना आवश्यक होगा ताकि दुरुपयोग की संभावना कम हो और कानून सभी पक्षों के लिए न्यायसंगत बना रहे।

कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यदि भविष्य में कोई व्यापक कानून बनाया जाता है, तो उसमें अधिवक्ताओं की सुरक्षा, त्वरित जांच, जवाबदेही और न्यायिक स्वतंत्रता जैसे विषयों पर स्पष्ट प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं।

कुल मिलाकर, यह विषय केवल अधिवक्ताओं की सुरक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि न्याय व्यवस्था में विश्वास और निष्पक्षता से भी जुड़ा हुआ माना जा रहा है।